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काश की तुम होती...!!

जब तन्हा रातों में मुझे नींद ना आती तो , तुम मेरे बालो को सहलाती , तुम मेरे लिए गुनगुनाती , काश तुम होती...

जब तन्हा रातों में मुझे नींद ना आती
तो,
तुम मेरे बालो को सहलाती,
तुम मेरे लिए गुनगुनाती,
काश तुम होती...

जब मैं करवटें बदलता
तो,
तुम्हारे बिखरे झुल्फों की भीनी खुशबू मेरे सांसो से टकराती,
काश तुम होती...

जब कभी रातों में मेरे होंठ सूखने लगते
तो,
तुम अपने होंठों से मेरी प्यास बुझाती,
काश तुम होती...

जब कभी सर्दी की रातों में मैं ठंड से ठिठुरता
तो,
तुम अपने बाहों का रजाई मुझे ओढ़ा देती,
काश तुम होती...

जब अलसायी सी सुबह मुझे उठने न देती तो,
तुम मुझे अपने होंठो के प्याले से चाय पिलाती।

काश की तुम होती...

@कमल